सरकार नहीं, दलालो का अधिकारी है निलेश रघुवंशी

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निलेश रघुवंशी, खरगोन का पूर्व विवादास्पद सहायक आयुक्त जिसने दलालो के साथ साठगांठ करके जुलाई में हुए छात्रावास अधिक्षको के स्थानान्तरण की सूची में लाखों के वारे-न्यारे कर लिए थे, तनख्वाह तो सरकार से लेता है, लेकिन काम दलालो के लिए करता है.

ईमानदारी की बड़ी-बड़ी बाते करने वाला निलेश रघुवंशी जब तक खरगोन में सहायक आयुक्त बनकर रहा, यहा के एक दलाल का वफ़ादार बनकर रहा.

दलालो के प्रति उसकी वफ़ादारी यहाँ तक ही नही रुकी, इन्दोर का रहने वाला एक और दलाल भी निलेश रघुवंशी को अपने इशारो पर नचाता है. इन्दोर का वो दलाल भी खरगोन के दलाल से सीधा जुड़ा हुआ है, और दोनों मिलकर निलेश रघुवंशी जैसे शर्मनाक अधिकारी के होते हुए मजे से घर में बैठकर विभाग चला रहे हैं.

इन्ही दलालो की गोटिया सेट करने निलेश रघुवंशी पिछले हप्ते गुरूवार को वापस खरगोन आया था. गुप्तचरो से पता चला कि निलेश दबे पाँव शाम तले खरगोन आया और रात में ही वापस निकल लिया. सुनने मे आया कि खरगोन में निलेश की जगह जो मेडम आई है, नई सहायक आयुक्त, उनकी उस दलाल से पटरी नही बैठ रही है, जो खुद को आजाक विभाग खरगोन का राजा समझने का मुगालता बरसो से पाले हुए विभाग की कुण्डली में बैठा है.

मेडम काम को तवज्जो दे रही है, बजाय ऐसे दलालो को.

खबर यही है कि दलाल का खास विश्वासपात्र निलेश उसी मकसद से आया था कि सारे पत्ते फ़िर से फ़िट करा दिए जाये.

लेकिन उसको उल्टे पैर वापस भागना पड़ा, क्योंकि मेडम ने इस सब फ़र्जीवाडे से साफ़ इंकार कर दिया है.