तीन डिग्री बढ़ा धरती का तापमान तो डूबने लगेंगे तटीय शहर

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जलवायु संकट की वजह से पिघलती बर्फ के कारण समुद्र का जल-स्तर इस सदी के अंत यानी वर्ष 2100 तक वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान से दोगुने से भी ऊपर निकल जाएगा। यह चौंकाने वाली बात अमेरिका के कोलाराडो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में प्रकाशित शोध में कही है। वैज्ञानिकों ने वर्ष 2100 तक समुद्र का जल-स्तर तीस सेंटीमीटर बढ़ने का अनुमान लगाया था। लेकिन नए शोध के मुताबिक अब यह पैंसठ सेंटीमीटर से भी अधिक बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं की मानें तो समुद्र का जल-स्तर हर साल 0.08 मिलीमीटर की दर से बढ़ रहा है। इसके लिए अलनीनो की वजह से समुद्री जल का तापमान बढ़ने और हवाओं का बदलता रुख भी काफी हद तक जिम्मेदार है। शोधकर्ताओं ने समुद्र के बढ़ते जल-स्तर के लिए दो महत्त्वपूर्ण कारण गिनाए हैं। एक यह कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की बढ़ती मात्रा के कारण धरती पर हवा और पानी का तापमान बढ़ रहा है। दूसरा, जमीनी बर्फ के तेजी से पिघलने से समुद्री जल-स्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक समुद्री जल-स्तर तेजी से बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ का तेजी से पिघलना है, जिसके लिए एकमात्र वजह जलवायु संकट है। याद होगा अभी कुछ दिन पहले मैक्सिको की खाड़ी में स्थित लुइसियाना का डेलाक्रोइस शहर देश-दुनिया में खूब चर्चा का विषय बना था। उसका कारण यह था कि यह शहर धीरे-धीरे समुद्र में समा रहा है। यहां समुद्र का पानी शहर एक बड़े हिस्से को निगल चुका है और पिछले एक सौ साल में लुइसियाना की 1880 वर्ग मील जमीन समुद्र में डूब चुकी है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि औसतन सत्रह वर्ग मील जमीन हर साल डूब रही है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर कहीं बड़ा समुद्री तूफान आया तो शहर का बड़ा हिस्सा समुद्र में समा सकता है। वर्ष 2016 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक पिछले सौ साल में समुद्र का पानी बढ़ने की रफ्तार पिछली सत्ताईस सदियों से ज्यादा है। वैज्ञानिकों की मानें तो अगर धरती का बढ़ता तापमान रोकने की कोशिश नहीं हुई तो दुनिया भर में समुद्र का स्तर पचास से एक सौ तीस सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। गौरतलब है कि अभी तक पहाड़ी ग्लेशियर की बर्फ ही समुद्र का पानी बढ़ा रही थी, मगर धरती के बढ़ते तापमान से अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की बर्फ भी पिघलने लगी है। ऐसा माना जा रहा है कि आगे चल कर इसी से समुद्र का पानी तेजी से बढ़ने वाला है। पिछले साल कैंब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि आने वाले एक-दो वर्षों में आर्कटिक समुद्र की बर्फ पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसका आधार वैज्ञानिकों द्वारा अमेरिका के नेशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर की ओर से ली गई सैटेलाइट तस्वीरें हैं।

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