संघ का गोपनिय सर्वे, आज चुनाव हो तो 96 सीटो पर सिमट जाएगी भाजपा

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सीएम शिवराज सिंह को टारगेट दिया है कि मध्यप्रदेश में इस बार 200 से ज्यादा सीटें जीतनी हैं परंतु जमीनी हालात कुछ और हैं। संघ का आंतरिक सर्वे कहता है कि यदि आज वोटिंग हुई और जो प्रत्याशी 2013 के चुनाव मैदान में थे, उन्हे ही वापस उतार दिया गया तो भाजपा 96 पर सिमट जाएगी जबकि सरकार बनाने के लिए मध्यप्रदेश में कम से कम 116 विधायक चाहिए। इसी सर्वे से घबराए शिवराज सिंह इन दिनों कई तरह गोपनीय मीटिंग कर रहे हैं। यही दवाब है जो उन्हें सरकारी मशीनरी और सरकारी खजाने को चुनावी तैयारियों में झोंकने के लिए बाध्य कर रहा है।
दरअसल, 2 तरह की रिपोर्ट ने सीएम शिवराज सिंह को परेशान कर रखा है। पहली संघ की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट है जो यह बता रही है कि कम से कम 70 मौजूदा विधायक ऐसे हैं जिन्हे फिर से टिकट दे दिया गया तो वो शर्तिया हार जाएंगे। इनमें कुछ मंत्री भी हैं। इधर, किसान आंदोलन और सिंधिया व कमलनाथ के सक्रिय हो जाने के बाद कांग्रेस के वो प्रत्याशी भी एक्टिव हो गए हैं जो 2013 के चुनाव में 5000 से कम वोटों से हारे थे। फिलहाल कांग्रेस के पास 56 विधायक हैं परंतु जिस तरह से दिग्विजय सिंह, सिंधिया और कमलनाथ एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस उन 60 सीटों पर मजबूत होती जा रही है जहां वो 5000 से कम वोटों से हारे थे। ऐसे में यदि मौजूदा कांग्रेसी विधायकों के साथ अतिरिक्त 60 विधायक जीतकर आ जाते हैं तो कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति मेें आ जाएगी। जबकि 96 पर सिमट रही भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, प्रदेश महामंत्री सुहास भगत, प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे सहित तमाम केंद्रीय मंत्रियों की गोपनीय बैठक इसी चिंता का प्रतिफल है। इन बैठकों को गोपनीय इसलिए रखा जा रहा है ताकि भाजपा के आम कार्यकर्ताओं तक यह दहशत ना उतर जाए। कार्यकर्ता भी मायूस हो गया तो काफी मुश्किल हो जाएगी।
मंत्रिमंडल विस्तार: नुक्सान कम फायदा ज्यादा का फार्मूला….
भाजपा के दिग्गज नेताओं के बीच चर्चा से पहले मुख्यमंत्री निवास पर सीएम, प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी व केंद्रीय मंत्री तोमर के बीच मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक नवरात्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल विस्तार कर सकते हैं। इस बार के विस्तार में मंत्रियों को अपने विभाग में प्रदर्शन के आधार पर अंदर बाहर नहीं किया जाएगा बल्कि आम जनता के बीच उनके प्रदर्शन के आधार पर फैसला होगा। जिसे बाहर किया जाएगा निश्चित रूप से वो नुक्सान पहुंचाएगा परंतु फार्मूला यह लगाया जा रहा है कि जिन्हे अंदर लिया जाएगा वो कितनी सीटों पर फायदा दिला सकते हैं।

*क्या बिना शिवराज के जीत जाएगी भाजपा..
एक विचार यह भी है कि यदि सीएम शिवराज सिंह चौहान को पीछे कर दिया जाए तो क्या मध्यप्रदेश में भाजपा अमित शाह के टागरेट के आसपास पहुंच जाएगी। संघ के कुछ प्रमुख प्रचारक जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश कर रहे हैं। वो जानना चाहते हैं कि जनता में 14 साल लगातार सत्ता में रहने के कारण जो स्वभाविक विरोध होता है, वही है या फिर यह विरोध केवल शिवराज सिंह चौहान तक सीमित है। यदि चेहरा बदल दिया जाए तो क्या होगा और सबसे बड़ा सवाल यह कि यदि 2018 में बिना चेहरे के चुनाव लड़ा जाए तो क्या फायदा होगा।